मंगलवार, 23 दिसंबर 2008

चाबी है क़दमों में दम भरने की


गम हर मुमकिन कोशिश करता है , हौसले को पस्त करने की

हौसला अटकलें लगाता है , हर हाल में जिन्दा रहने की

एक बूँद हो जैसे भी , दवा और दुआ के फलने की

मौसमों का असर वाजिब है , उम्र की राह पे ढलने को

दिल किसे पकड़े , किसे जकड़े , किसी तर्ज पे चलने को

हौसले को आदत है , दुनिया से जुदा चलने की

सोच के संग हौसले को सी लेना ,

यही चाबी है क़दमों में दम भरने की

2 टिप्‍पणियां:

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

सच लिखा है आपने

पंखों से नहीं हौंसलों से उडान होती है...

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

bahut badhiya bhavapoorn rachana .dhanyawad.