बुधवार, 20 मार्च 2013

विश्व गौरैय्या दिवस

भोली-भाली प्यारी-प्यारी , नन्ही चिड़िया 
तुझ बिन सूने घर-आँगन और द्वार-अटरिया 
चूँ-चूँ करती आती चिड़िया 
मुहँ में दाना भर उड़ जाती चिड़िया 
तिनका-तिनका जोड़ घोंसला , कारीगर बन जाती चिड़िया 
नन्हें बच्चों की चोंचों में , दाना रख-रख आती चिड़िया 
चिड़िया चिड़ा दुलारा उड़ते सँग-सँग , मन ही मन हर्षाती चिड़िया 
इक दिन उड़ें तो लौटें न घर , बच्चों बिन अकेली रह जाती चिड़िया 
रोज सुबह दस्तक देती है , मन उपवन महकाती चिड़िया 
नन्ही जान है बया-गौरैय्या , फुदक-फुदक कर मन बहलाती चिड़िया 

4 टिप्‍पणियां:

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,गौरया बहुत ही प्यारी लगती है.

Chaitanyaa Sharma ने कहा…

प्यारी नन्ही गौरैया की चहक सदा बनी रहे ...

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-03-2013) के चर्चा मंच 1193 पर भी होगी. सूचनार्थ

HARSHVARDHAN ने कहा…

गौरैया पर बहुत ही सुन्दर कविता लिखी है। आभार :)

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