गुरुवार, 4 दिसंबर 2008

कविता को कहानी चाहिए

लेखक लोग कहते हैं ,कविता लम्बी चाहिए

आम तौर पर लोग कहते हैं , थोड़े में बात पते की चाहिए

रुक तो सही कुछ पल को ही ,थोड़ी जिंदगानी चाहिए

आदमी के दर्दे-इश्क को , इश्क की रवानी चाहिए

उठते हुए क़दमों को , जिगर की जवानी चाहिए

कुछ घूँट ही मिल जाये जो , जिन्दगी की निशानी चाहिए

चख तो ले तू स्वाद इसका , बहलने को बहाना चाहिए

दिल की उजड़ी बस्तियों को ,चमन सा बसाना चाहिए

बात तो इतनी पते की , कविता को कहानी चाहिए

छू जाये जो दिल को , रुक कर थोड़ी हैरानी चाहिए

4 टिप्‍पणियां:

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

अच्छी रचना के लिये बधाई स्वीकारें

BrijmohanShrivastava ने कहा…

किसी कवि के ब्लॉग पर में कविता पढ़ रहा था वहा उस कवि को आपने कहा था कि "" आप ऐसी ही कविता मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकेंगे +जीवन का पलडा भारी है + तो मेरी भी इच्छा कविता पढने की हुई /यहाँ पर मुझे उक्त शीर्षक की कविता पढने को नहीं मिली /"कविता को कहानी चाहिए "जीवन को संध्या वंदन सिखाओ /तथा आतंकी हमले पर सड़कों पर विखर है लहू पढी /आपकी रचनाये थोड़े में बहुत कुछ कह जाती हैं /इश्क की रवानी जिगर की जवानी ,थोड़ी जिंदगानी जैसी तुकांत भाषा ने रचना को सुन्दरता प्रदान कर दी है वैसे भी आपने कहा है के थोड़े में बात पते की होना चाहिए /थोड़ी हैरानी जो दिल को छू जाए इस लाइन में कुछ सोचने को मजबूर करती गंभीरता है

R K Rana ने कहा…

Hi Mama,
First of all I would like to give so many thanks ki ap etna achha writing karte hain, I belong to Lucknow and working in Delhi, a graduate in English and Masters in Management with 4 years of industry experience in Human resource.

App really bahut hi achhi kavitaye likhti hain, main apka bahut bada fan ho gaya hu jis din se main apka blog dekha hai.
Congralutalation for yours thoughts jo dil ko chhu lete hain.
Regards
Ravi

शारदा अरोरा ने कहा…

मेरी हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | मौदगिल जी जैसे बड़े कवि का प्रोत्साहन ही बड़ी बात है| ब्रज मोहन जी ने भी बड़े सुंदर शब्दों में मेरी कितनी ही रचनाओं को जगह दी है | आप जिस कविता को ढूँढ रहे हैं , वो मेरे ब्लॉग के ब्लॉग आर्काइव पर अगस्त की रचनाओं में मिलेगी | यही कविता अमर उजाला में १०दिस.०७ में छपी थी , कुछ शब्द हेरफेर के साथ छप गए थे | और राना , माई सन , कमाल हो गया , मन की रोशनी कमाल होती है , बाती में पड़ा तेल ,धमाल हो गया |