गुरुवार, 20 नवंबर 2008

आदमी का मन और भावभंगिमाओं का तालमेल


आदमी का मन और भावभंगिमाओं का तालमेल देखिये
निश्छलता और खुशी का यूँ कुछ मेल देखिये
बच्चे के साथ हँसते -गाते , तोतली जुबानों में उसका बचपन देखिये
मन में आई लाज तो ,
झुकी पलकों में लाल-लाल डोरे देखिये
बांकी चितवन की मुस्कराहट सरे आम देखिये
भृकुटी चढ़ी , ललकारता हुआ रौद्र रूप देखिये
उसकी जुबानों में उतरा उसका निकृष्टतम रूप देखिये
तीर सी चीरती ,पैनी नज़र , शक के दायरे में लिपटी
रहस्यमय नज़र का रहस्यमय रूप देखिये
छल से ओढी हुई मुस्कराहट ,मुखौटे का असल रूप देखिये
कितना छिपाएगा ,असल का नक़ल रूप देखिये
गले तक डूबा हुआ ,नम निगाहों से गर्माहट के साथ -साथ तेरे गम पकड़ता
तेरे आराम को हथेली पर सहेजता ,
खुदा की न्यामत का सफल रूप देखिये

1 टिप्पणी:

विनय ने कहा…

भावनाओं के सजदे में!