मंगलवार, 4 नवंबर 2008

मन खिलखिलाना भूल जायेगा

जीने के लिए बहुत कुछ है

दिन और रात

सर्द गर्म मौसम के आसार

कर्त्तव्य और अधिकार

प्यार और मनुहार

शौक और अरमानों का संसार

मर्यादाओं पर जाँनिसार

कुछ भी चुनना

पर मत खोना

मन की चमक

मत भारी करना

मन का बोझ

इसकी अपनी खुशबू

दब जायेगी

मन खिलखिलाना भूल जायेगा

मन प्यार करना भूल जाएगा



3 टिप्‍पणियां:

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

अच्छा िलखा है आपने । भाव बहुत संुदर है ।

http://www.ashokvichar.blogspot.com

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा,बधाई.

अल्पना वर्मा ने कहा…

कुछ भी चुनना

पर मत खोना

मन की चमक ...
bahut hi achchey bhaav hain Sharda ji...Na jaane kitne dil ki chamak jimmedariyon aur commitments mein dhumil ho chuki hai---
umeed hai kavita ka sandesh un sab tak bhi pahuncheyga..