सोमवार, 25 मई 2009

ये कहाँ जा रहे हैं हम !




विएना में गोली चलने के विरोध में पंजाब में प्रदर्शन-कारियों ने कितनी ही रेलगाड़ियों में आग लगाई , जाम किए , तोड़फोड़ की | क्या कोई दूसरा रास्ता नहीं था विरोध प्रदर्शन का ? जिस ताकत को आप सृजन में लगा सकते थे वो आपने विध्वंस में लगा दी | नुक्सान चाहे व्यक्ति विशेष का हो या देश की सम्पत्ति का , भरपाई मनुष्य को ही करनी पड़ती है | सरकार कर के रूप में , महंगाई के रूप में हमसे वसूल ही लेगी | जो क्षति मनुष्यता की होती है उसकी भरपाई पीढियों को करनी पड़ती है |


हमें जरुरत है ऐसे नेताओं की , जो शांतिपूर्ण ढँग , न्यायोचित ढँग से मनुष्यता को नेतृत्त्व दे सकें ; हमारी बात दुनिया के सामने रख सकें | भीड़ जब ताकत का प्रदर्शन करती है , उसकी ऊर्जा में सब बह जाता है , कई बार लोग ऐसे हालातों की आड़ में व्यक्तिगत दुश्मनियाँ भी निकाल लेते हैं | जब तक होश आता है वक़्त हाथ से निकल चुका होता है |


आज के हालात में हम सरकार पर ही तो दबाव बनाना चाह रहे हैं कि वो कुछ करे , सरकार हम आप जैसे लोगों से ही बनी है | और जो लोग विध्वंसात्मक ऊर्जा के शिकार हुए वो भी हम आप में से ही हैं | नुक्सान सिर्फ़ भौतिक स्तर पर ही नहीं होता , भावनात्मक स्तर पर जो होता है उसे यादों की किताब से मिटाना मुश्किल ही होता है | हम कुछ ऐसा करें कि दुनिया अगर याद भी रख सके तो ऐसा करें कि हमें याद करते ही दुनिया की दुखती रगें हिलने लगें | जब हमारे पड़ोसी के घर आग लगी होगी तो क्या आँच हम तक पहुंचेगी ? जब वो भूखा सोया होगा तो क्या हम उसकी सिसकियाँ सुन सकेंगे ? मानव होकर भी मानवीय संवेदनाओं रहित ? ये कहाँ जा रहे हैं हम !

8 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

आप से पूरी तरह सहमत हूँ।

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

शारदा जी,

शब्द जो चेतन के साथ अवचेतन को भी झकझोर दे अपनी सार्थकता को पाते हैं ऐसे ही शब्दों से रचा गया आलेख ऐसे प्रश्‍न पैदा करता है कि हम कहाँ जा रहे है?

बधाईयाँ.

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

हिन्द-युग्म पर आपकी टिप्पणी मुझे यहाँ तक ले आई, अब तो आना बना रहेगा।

रंजीत ने कहा…

bahut hee dukhad hai yah. Kya insaan yah saabit karnaa chahta hai kee wah sabhya nahin hua, shayad wah yah saabit karna chahta hai kee we aaj bhee thode-thode pashu hee hain

संगीता पुरी ने कहा…

बिल्‍कुल सही कहा ..

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत अफसोसजनक घटना.

Science Bloggers Association ने कहा…

आपके ब्लॉग का नाम बहुत प्यारा है। और हाँ, आपने समकालीन घटनाओं के बहाने सार्थक और विचारणीय बातें कही हैं।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

sunil ने कहा…

bhabhishre
bychance i was in that chennai -jammutawi train set on fire at jallandhar cantt station.i know exactly wat happened there.

sunil ने कहा…

bhabhishre
bychance i was in that chennai -jammutawi train set on fire at jallandhar cantt station.i know exactly wat happened there.