बुधवार, 22 अप्रैल 2009

सुबह की चाय का प्याला

सुबह की चाय का प्याला पी लो

तेरे मेरे साथ की चाह का प्याला पी लो

खुशनुमा सुबह के अहसास का प्याला पी लो

सूरज उगता है बस तेरे लिए

मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए

ये सौगात है बस तेरे लिए

लपको , पकडो हर उस बात को पी लो

सुबह की चाय का प्याला पी लो

अपने हिस्से की हर बात को जी लो

3 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत खूब ..

Udan Tashtari ने कहा…

सुबह की चाय का प्याला पी लो
अपने हिस्से की हर बात को जी लो

--सुबह की चाय का प्याला -एक अलग अहमियत रखता है..क्या खूब उकेरा है.

अनिल कान्त : ने कहा…

waah !!