मंगलवार, 7 अक्तूबर 2008

ख्वाब

ख्वाब जिनके हसीन होते हैं
जिंदगी के करीब होते हैं

उंगली पकड़ चलना सिखाते हैं अरमान
हकीकत की जमीन पर ही खड़े होते हैं

रेशमी धागों से जकड़ी बेड़ियों संग
ख्वाब ही के तो पंख लगे होते हैं

बिन ख्वाब के सूनी जिन्दगी
जैसे मरघट पे खड़े होते हैं

रोशनी से नहाये हुए थके कदम भी
पंख उगते ही ,उडे होते हैं

रोशनी है ख्वाब ही के दम पे
सुनहरी आखर की ताब होते हैं





6 टिप्‍पणियां:

neeshoo ने कहा…

bahut badhiya likha aap ne

शोभा ने कहा…

वाह! बहुत बढ़िया लिखा है.

mehek ने कहा…

sach kaha kwab aise hi hote hai bahut sundar

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

achchi kavita likhi hai aapney.

http://www.ashokvichar.blogspot.com

manvinder bhimber ने कहा…

रोशनी से नहाये हुए थके कदम भी
पंख उगते ही ,उडे होते हैं
रोशनी है ख्वाब ही के दम पे
सुनहरी आखर की ताब होते हैं
beautiful.....

श्रीकांत पाराशर ने कहा…

Ek sundar rachna.