सोमवार, 3 अगस्त 2009

एक किरण आशा की




एक किरण आशा की , सपने हजार लाती है
डूबे हों कितने भी , पल में उबार लाती है



.तिनका-तिनका बिखरे हों , जमीं से उखड़े हों
राहगुजर दिखलाती , एक किरण आशा की
मन्डराते बादलों से पँख उधार लाती है
डूबे हों कितने भी , पल में उबार लाती है


२.बादलों से गुजरे हों ,रँग सब बिखरे हों
खुशबू की तूलिका सी , एक किरण आशा की
सुरमई सपनों के मन्जर उतार लाती है
डूबे हों कितने भी , पल में उबार लाती है



3.तिनकों सा जुड़ती है , हवाओं में घुलती है
सुबह सी सतरंगी ,एक किरण आशा की
दस्तक देते ही सूरज उतार लाती है
डूबे हों कितने भी , पल में उबार लाती है


5 टिप्‍पणियां:

ओम आर्य ने कहा…

ek preanatmak rachana ............utsaah wardhan to karati hai .........bahut hi sarthak rachana

M VERMA ने कहा…

behatareen bhaav
khoobsoorat rachanaa

AlbelaKhatri.com ने कहा…

umang ki rachna
tarang ki rachna
jeevan k vaastvik rang ki rachnaa

___________ye rachnaa badhaai ki paatra hai
aapka abhinandan !

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत प्रेरक छंद हैं..आभार इस प्रस्तुति का.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

आशा ही तो जीवन है।

रक्षाबंधन पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
विश्व-भ्रातृत्व विजयी हो!