सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

तेरे उपहार बड़े छोटे हैं


तेरे उपहार बड़े छोटे हैं


मुझको इंतज़ार है , कुदरत के उपहारों का


तेरे उपहार बड़े फीके हैं


मुझको इंतजार है , किन्हीं दमदारों का


तेरी दुनिया में हेरा-फेरी है


उसकी दुनिया में तो बस देरी है


तेरी दुनिया में सब्र नहीं होता


राज उसके में अन्धेर नहीं होता


वो जो देता है झोलियाँ भर-भर के


पास उसके हर दौलत का अम्बार लगा


नाम अपना भी नहीं लेता


करता मालामाल है , बिन माँगे


उसकी मर्जी हो तो क्या नहीं होता


अदृशय सी इक आँख लिए , वो देखता है


खुदा बनी खुदी का दम देखता है



3 टिप्‍पणियां:

SWAPN ने कहा…

achchi rachna

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

रचनाकार विधाता है, वो जग का स्रजनहार है।
माटी का, जीवित पुतला, सर्व-श्रेष्ठ उपहार है।।

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर लिखा है.....