मंगलवार, 20 जनवरी 2009

अणु


विचार ही तो लाता है


विचारों के झंझावत


सिर पे चढ़ के बोलता


है भेद सारे खोलता


चेहरे के सारे रँगों में


विचार ही गुनगुनाता है



विचारों की तह में है जो अणु


उसे पकड़ , उसे पकड़


रेला विचारों का वही


साथ ले के आयेगा


वही तुझे चलायेगा



टूटे दिलों को जोड़ना


है ही सच्ची प्रार्थना


तू सेतु बन , तू सेतु बन


विचार और कर्म का


कर्म हों तेरी प्रार्थना


टूटे दिलों को जोड़ते


सेतु बन , आवागमन की राह खोलते


3 टिप्‍पणियां:

विनय ने कहा…

बहुत सुन्दर, बधाई

---आपका हार्दिक स्वागत है
चाँद, बादल और शाम

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा विचार-बेहतरीन रचना.

mamta ने कहा…

सुंदर भाव ।