शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

दाना-दाना निगलाया आशा का

तिनका-तिनका चुन कर नीड़ बनाया आशा का 
कर पायेंगे , उड़ पायेंगे , दिन अच्छे भी आयेंगे 
दाना-दाना निगलाया आशा का 

कोई टहनी , कोई शाखा , कोई जमीं , कोई आसमाँ 
नन्हें पँखों को सहलाया , दिन अच्छे भी आयेंगे  
दाना-दाना निगलाया आशा का 

भरते हैं घूँट भी हम अक्सर किरणों के प्याले से 
आएगा सबेरा ,निकलेगा सूरज , विष्वास दिलाया 
दिन अच्छे भी आयेंगे 
दाना-दाना निगलाया आशा का 

8 टिप्‍पणियां:

अरुन शर्मा "अनंत" ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल रविवार 10-फरवरी-13 को चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है.

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत सुन्दर व् भावात्मक प्रस्तुति .ये क्या कर रहे हैं दामिनी के पिता जी ? आप भी जाने अफ़रोज़ ,कसाब-कॉंग्रेस के गले की फांस

madhu singh ने कहा…

sundar bhavpurn prastuti

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना

शारदा अरोरा ने कहा…

charchamanch par lagaane se thode aur logon ki najron ke samne se post gujarti hai...magar jaruri nahi ki sab comments bhi den...kyonki ya to unhe rachna pasand nahi aati ya fir soch hi rakha hota hai ki promote nahi karna hai ...padh lete hain itna hi ahsan bahut hai...aapka bahut bahut shukriya Arun ji ..sabke sneh ka bhi shukriya ..

Rajesh Kumari ने कहा…

सुंदर आशावादी भाव दर्शाती प्रस्तुति बधाई आपको

Pallavi saxena ने कहा…

बस जीवन भर यही एक आशा बनी रहे ...क्यूंकि उम्मीद पर दुनिया कायम है शुभकामनायें आपको.

Swati Joshi Pant ने कहा…

jeevan asha par hee tika hai...