रविवार, 25 दिसंबर 2011

आज साँझ जब

आज साँझ जब उतरो चन्दा नील गगन में
सारी खुशियाँ भर लाना अपने दामन में

कितनी आँखें लगी हुईं हैं , राह तुम्हारी देख रही हैं
एक नहीं मैं ही ये माँगूं , हाथ उठे हैं कितने दुआ में

पिया गए परदेस भले हों , उनकी खबर तुम ले आना
महक उठे ये घर-अँगना , करते बातें लम्हे कानों में

चन्दा से चन्दा की बातें , मनुहार है सारी उसी पिया की
सज कर तुमसे मिलने आते , भेद है क्या इस बतियाने में

प्यार सिँगार है , दुनिया में सबसे सस्ता
दिलबर लेकिन सबसे महँगा , चन्दा ज्यों है तारों में

2 टिप्‍पणियां:

dr.mahendrag ने कहा…

Sundar rachna

अजय कुमार झा ने कहा…

प्यारे अहसासों से सज़े शब्द