शनिवार, 14 अगस्त 2010

कुछ वतन की बात करें

पन्द्रह अगस्त पर ...
अपने दायरे से बाहर निकलें तो कुछ वतन की बात करें
काँटों से दामन छुड़ा लें तो खुशबु-ऐ-चमन की बात करें

उलझे हैं साथी में रोजी-रोटी में
हादसों से बाहर आ , सुकूने-वतन की बात करें

आसमान छूती हुई है हर शय
गिरी हमारी ही कीमत , अदबे-वतन की बात करें

इतरा कर झुक जाती वो डाली
मुस्कराती हो जिसकी हर कली , वफ़ा-ऐ-वतन की बात करें

सीने में समन्दर आ ठहरे
वीराँ भी गुलशन हो जाये , खुशबू-ऐ-वतन की बात करें

बिखरा हुआ तो हर फूल है उदास
सेहरे में गुँचा हो जाएँ , शाने-ऐ-वतन की बात करें

अपने दायरे से बाहर निकलें तो कुछ वतन की बात करें
काँटों से दामन छुड़ा लें तो खुशबु-ऐ-चमन की बात करें


रचना वर्मा की पोस्ट ' कहां है वो जज्बा ऐ आजादी ' पर आप आमंत्रित हैं

7 टिप्‍पणियां:

ajit gupta ने कहा…

स्‍वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई।

M VERMA ने कहा…

अपने दायरे से बाहर निकलें तो कुछ वतन की बात करें
काँटों से दामन छुड़ा लें तो खुशबु-ऐ-चमन की बात करें
सुन्दर आह्वान
सुन्दर रचना

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

अपने दायरे से बाहर निकलें तो कुछ वतन की बात करें
काँटों से दामन छुड़ा लें तो खुशबु-ऐ-चमन की बात करें...
सटीक सवाल हैं शारदा जी,
फिर भी चलिए जश्न-ए-आज़ादी मनाएं...
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

राज भाटिय़ा ने कहा…

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

बहुत बढ़िया शारदा जी,मन की व्यथा को शब्द दे दिये हैं आप ने

मनोज कुमार ने कहा…

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आप एवं आपके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!

सत्यप्रकाश पाण्डेय ने कहा…

बहुत बढ़िया,
शुभकामनाएँ!