बुधवार, 20 अक्तूबर 2010

अभी तो अहसास है तेरा

उन्नीस अक्टूबर , छोटी बेटी का जन्मदिन , दो दिन उसके साथ ही बिता कर लौटी हूँ । तीनों बच्चे जब छोटे थे , उनके दादा जी बड़ी पोती को शेर , छोटी पोती को चिड़िया और छोटे पोते को तोता कहा करते थे । बड़ी बेटी ने भी छोटी बहन को चिया कहना शुरू कर दिया था । यही चिया पिछले साल कॉलेज के बाद की छुट्टियाँ घर बिता कर , जिस रात नारसी मुंजी मुम्बई के एम.बी.ए.के एंट्रेंस टेस्ट के इन्टरवियु के लिये गई , उसी रात की अगली सुबह के अहसास ने इस नज्म को लिख दिया ।
अभी तो अहसास है तेरा
चादर की उन सलवटों में
बिस्तर अभी नहीं बदला मैंने
अभी तो अहसास है तेरा
फ्रिज में रखे उस बचे दूध के गिलास में
उसको अभी अभी है देखा मैंन
चिड़िया मेरी ने उड़ान भरी
दूर , बहुत दूर आकाश में
मैं खुश हूँ बहुत , बहुत
मैं देख लूँगी दुनिया
तेरी आँख से , तेरे साथ साथ में
लम्बी उड़ान भरते ही
दूर हो जाते हैं , घरौंदे से
मस्ती के उस साथ से
क्या करें , मजबूरी है
तेरे उड़ने को आसमान भी जरुरी है
तेरा अहसास , तेरी खुशबू
फ़िज़ाओं में आस पास है

तेरे अहसास के अहसास को
सँजो के रखना चाहा
सुबह उठते ही ये सोचा
न कोई खलल हो
तेरी नीँद में , किसी शोर से
जग कर भी मैं हूँ किस नीँद में
बिस्तर है तेरा खाली
और अहसास ने तुझे पास बुला रक्खा है

3 टिप्‍पणियां:

Pratik Maheshwari ने कहा…

काफी अच्छा लगा पढ़ कर...
सुन्दर रचना..

आभार

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

खूबसूरत अलफ़ाज़ में पेश किए गए अहसास...
दिल को छू गए.

kshama ने कहा…

तेरे अहसास के अहसास को
सँजो के रखना चाहा
सुबह उठते ही ये सोचा
न कोई खलल हो
तेरी नीँद में , किसी शोर से
जग कर भी मैं हूँ किस नीँद में
बिस्तर है तेरा खाली
और अहसास ने तुझे पास बुला रक्खा है
Aah! Mujhe apnee bitiyaa kaa jana yaad aa gaya...aankhen bhar aayeen..."Ja ud jaare O paride! Tu need naya bana lere!"