बुधवार, 6 जनवरी 2010

जीवन का पलड़ा भारी है

दुर्भाग्य से तो समझौता करें , ही दुर्भाग्य को निमंत्रण दें .......जिन्दगी हर हाल में चलती रहनी चाहिए .......क्योंकि जिन्दगी से ज्यादा खूबसूरत कोई चीज है ही नहीं ......करें तो जिन्दगी से समझौता करें | दूसरे के मन का सदा ख्याल रखें , कोई चुभती हुई बात जाने वो कितनी गहरी उठा लेगा |

हालातों से , संघर्षों से
तेरे मन के अंतर्द्वंदों से
जीवन का पलड़ा भारी है

भ्रमों से ,विषादों से
नीरवता के कोलाहल से
जीवन का पलड़ा भारी है

तेरे अहं से, तेरे दम्भ से
तेरी विष से भरी जुबानों से
जीवन का पलड़ा भारी है

तेरी जाति से , तेरे धर्म से
तेरे ऊँचे नीचे समाजों से
जीवन का पलड़ा भारी है

तेरे सुखों से , आरामों से
वैभव के साजो-सामानों से
जीवन का पलड़ा भारी है

तेरे अनुत्तरित सवालों से
कर्मों का पलड़ा भारी है
जीवन का पलड़ा भारी है

2 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

bahut hi sundar se jeevan darshan diya hai..........sach kaha hai .............jeevan bahut hi anmol hai magar phir bhi kisi ki kya majboori rahi ki usne aisa kiya samajh nhi aata ......hoka rmajboor usne ye kadam uthaya hoga.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर बात कही आप ने कविता के माध्यम से, धन्यवाद इस सुंदर संदेश के लिये