बुधवार, 8 जनवरी 2020

बड़ा मुबारक

वो भी डोलती होगी किसी के अँगने में 
होगी वो भी किसी की जाँ ,
झूलती होगी ममता के पलने में 

प्यार उमड़ता है मुस्करा उठते हैं 

अहसास उठते हैं रह-रह के सीने में 
सींचता है कोई माली हर फूल को 
आबाद रहे हर फूल की दुनिया 
गुलशन के कोने-कोने में 

बड़ा मुबारक है आज का दिन 

सूरज जो चढ़ा खिड़-खिड़ करता 
कितने सारे चाँद उगे हैं ,
महफ़िल के अफ़साने में 

मेरी दुआओं का असर है शायद 

हसीन से सपनों में कोई रँग भरता 
तुम छम-छम करती आ जाओ 
कैद कर लेंगे तुम्हें सफर सुहाने में 

कोई टिप्पणी नहीं: