बुधवार, 17 जुलाई 2013

दुनियाँ-जहान की खुशियाँ तुम्हें मिलें

बेटे ने चार्टर्ड-एकाउनटेंट की फ़ाइनल परीक्षा डिस्टिंक्शन के साथ पास कर ली , मन बाग़-बाग़ हो उठा ....

दुनियाँ-जहान की खुशियाँ तुम्हें मिलें 

ये जो चाँद मुस्कराता है ,
आसमान सी ऊँचाइयाँ तुम्हें मिलें 

वो कौन सी डगर है ,
खिले हों फूल हर तरफ , अमराइयाँ तुम्हें मिलें 

गर धूप हो कहीं तो ,
ममता की छाँव सी , पुरवाइयाँ तुम्हें मिलें 

हीरा भी तो पत्थर ही है , 
तराश लो , कोहेनूर सी रश्मियाँ तुम्हें मिलें 

ज़िन्दगी खुद ही न्यामत है ,
सफलता है सोने पे सुहागा , हर बार तुम्हें मिले

चलो झूम लें सुरूर में , 
खुमार में , दुनियाँ-जहान की खुशियाँ तुम्हें मिलें 



3 टिप्‍पणियां:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

बधाई और ढेरों शुभकामनाये !

kshama ने कहा…


वो कौन सी डगर है ,
खिले हों फूल हर तरफ , अमराइयाँ तुम्हें मिलें
Kitni pyari dua hai!

राजेंद्र कुमार ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती,आभार।