शनिवार, 10 अक्तूबर 2009

अपना अपना जोग भया

दुख दारु सुख रोग भया
दारु दारु उन्माद हुआ

दुख न हुआ प्रमाद हुआ
गीतों में ढल कर शाद हुआ


किर्चों से मिल कर नाद हुआ
खुशबू में बँट आबाद हुआ


दुख दारु सुख रोग भया
अपना अपना जोग भया

2 टिप्‍पणियां:

ओम आर्य ने कहा…

BAHUT HI SUNDAR RACHANA...

राज भाटिय़ा ने कहा…

दुख दारु सुख रोग भया
अपना अपना जोग भया
वाह क्या बात है बहुत सुंदर.
धन्यवाद