मंगलवार, 25 अगस्त 2015

पेरेन्ट्स का रिटायरमेंट

तुम इस बदलाव के साझीदार बने 
हो हर कदम पर हमारे साथ 
ये सुकून है हमको 
बोये थे जो बीज कभी ,
फूल बन कर लहलहाये हैं 
दुनिया की हवाओं में भी जो महफूज़ रहे 
रिश्तों की उसी छाँव में चल के आये हैं 

हमारी धूप पहुँची है तुम्हारे दिल तक 
यही बहुत है हमारे जीने के लिये 
गर ये पड़ाव इतना हसीन है तो 
हमें जरुरत क्या अतीत में झाँकने की 

उम्र ने देख लिया ये पड़ाव भी हँसते-हँसते 
पेरेन्ट्स का रिटायरमेंट ,
ज़िन्दगी की है नये सिरे से शुरुआत 
बच्चों ने भी लिया इसे हाथों-हाथ 

अब हम पर मौसम का असर नहीं होता 
तुम्हारी ठण्डी हवाएँ तैर लेती हैं हमारे आस-पास 
तुम्हारे चेहरे हमसे बतिया लेते हैं 

3 टिप्‍पणियां:

KAHKASHAN KHAN ने कहा…

शानदार रचना। विषय भी अच्‍छा चुना है।

शारदा अरोरा ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद, कहकशाँ जी ...

हिमकर श्याम ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति