मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

ज़िन्दगानी का सबब

हम सबने एक ही जाम पिया 
थोड़ा सोडा , थोड़ी शराब ,
थोड़ा पानी 
थोड़ा हाजमा ,थोड़ा नशा ,
थोड़ी ज़िन्दगानी 

प्यास और नशे का फर्क ढूँढते रहे 
ज़िन्दगानी का सबब खोजते रहे 

उफन कर बहे नहीं ,
ख़्वाब ढूँढते रहे 

ग़ाफ़िल हैं सफ़र में 
अन्दाज़ ढूँढते रहे 

5 टिप्‍पणियां:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

बहुत सुंदर
आभार !

Vinay Prajapati ने कहा…

:)

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर.
नई पोस्ट : फागुन की धूप

Kailash Sharma ने कहा…

उफन कर बहे नहीं ,
ख़्वाब ढूँढते रहे
...वाह...बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

06shikhakaushik ने कहा…

sundar