गुरुवार, 20 अगस्त 2026

कभी बेवजह ही


कभी बेवजह ही गुनगुनाइये 

बदल जायेंगे मन के मौसम , बेवजह यूँ ही मुस्कुराइए 


छँट जाएँगे ग़म के सारे बादल 

हर रात लाती है सुबह ये जान जाइए 


तैरना आ जाएगा भँवर में भी 

भारहीन होने की कला जान जाइए 


मुश्किलें हैं तो हैं ,होने दो 

लय मिलाना सीख जाइए 


हर ग़म गुज़र ही जायेगा 

बिखरना मना है निखरना सीख जाइए 


ज़िन्दगी है साँस-साँस एक जश्न 

साथ-साथ थिरकना सीख जाइए 


कभी बेवजह ही गुनगुनाइये 

बदल जायेंगे मन के मौसम , बेवजह यूँ ही मुस्कुराइए 




7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 26 अगस्त 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।

    जवाब देंहटाएं
  2. बेहतरीन गज़ल नुमा कविता
    वंदन

    जवाब देंहटाएं
  3. तैरना आ जाएगा भँवर में भी

    भारहीन होने की कला जान जाइए
    भारहीन होने के लिए मैं को छोड़ना होगा और ये कला आनी इतनी भी आसान कहाँ।

    जवाब देंहटाएं
  4. तैरना आ जाएगा भँवर में भी

    भारहीन होने की कला जान जाइए
    भारहीन होने के लिए मैं के बोझ को छोड़ना होगा ।
    ये कला इतनी भी आसान कहाँ ...
    सुंदर सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  5. जोशी जी , दिग्विजय जी , सुधा जी बहुत बहुत धन्यवाद । पम्मी जी link को शामिल करने का बहुत बहुत आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  6. बिखरना मना है
    लाजवाब है यह मनाही

    जवाब देंहटाएं

आपके सुझावों , भर्त्सना और हौसला अफजाई का स्वागत है