सोमवार, 25 मई 2026

जीने की ज़िद

 


ख़्वाब जीने की ज़िद पे अड़े हैं 

आँधियों से ये भरसक लड़े हैं 

जमाने ने क़तरे हैं पंख 

हौसले से ये अब तक खड़े हैं 


उतरी मिट्टी भी है जड़ों से 

समंदर बहाए या सींचे

ये कस के पकड़े हैं जमीं को 

इनके इम्तिहाँ भी अब कड़े हैं 


जो होगा देखा जाएगा 

वक्त गढ़ता है गढ़ता रहेगा 

एक छैनी जो दिल पर चली है 

सितम सारे ही दिल पर जड़े हैं 


बचेंगे साबुत या फ़ना हो रहेंगे 

निशाँ अपने भी कुछ तो कहेंगे 

कभी काम के तो थे हम भी

आज धराशाई हो यूँ पड़े हैं 


मंगलवार, 12 मई 2026

पापा


श्रद्धांजलि

पापा छत ,पूरा आसमान लपेटे हुए 

बच्चों की पूरी दुनिया 

बच्चों से चहकती उनकी फुलवारी 

बच्चों की ख़ुशी में खुश , बच्चों की मामूली से मामूली ज़रूरत भी उनकी प्राथमिकता 


पापा महफ़ूज़ियत , सुरक्षा का दूसरा नाम 

पापा हैं तो कोई ग़म नहीं फटकता पास 

पापा हैं तो काँटों की बाड़ी में भी हर आराम 

पापा जैसे जीवन की कड़ी धूप में बरगद की छाया का अहसास 


पापा बेटियों के हीरो

उँगली पकड़ के चलना सिखाते जो 

कन्धे पर बिठा दुनिया दिखाते जो 

पापा घर की शान 

पापा नाम , शोहरत , पहचान 

पापा हैं तो है दुनिया को जीत लेने का अहसास  


पापा माँ की आँखों की चमक 

माँ के चेहरे का नूर 

माँ का सच्चा श्रृंगार 

पापा सिर का ताज 

पापा हैं तो यकीन और हौसला साथ 


पापा का जाना 

एक रिक्तता का पसर जाना 

जिसकी कोई भरपाई नहीं

रह गईं तो फ़क़त उनकी बातें बाक़ी 

रह गई तो बस उनके सौम्य व्यक्तित्व की महक बाक़ी 

और यादों में बचा है उनका बात-बात पर मृदु परिहास , रिश्ते की गर्मी और नसीहतें 

नहीं दिल दुखाया उन्होंने किसी का भी 

हम जो कुछ भी हैं आज ,उनकी ही वजह से हैं 

बस यही निशाँ हैं उनके और उनका यही खजाना है हमारे पास 

हमारे पापा , हमारा पूरा आसमान