वो जो तुम छोड़ गए हो इक अधूरी सी चाय ,अभी बाक़ी है
अभी गमकती है वो प्यालों की खनक , तेरे साथ की महक
अभी तलक है तेरी राह पे नजर
तेरा इंतिज़ार है रौशन
कितनी बातें अधूरी छूट गईं हैं
वो लम्हें जो ज़िंदा हैं ज़ेहन में ,कहन माँगते हैं ; तेरे साथ का सहन माँगते हैं
निशां बाक़ी हैं , मंजर ज़िंदा हैं
वो अधूरी सी चाय बोलती इतना
ठण्डी न हो जाये तेरे इंतिज़ार की ललक
आओ कि जी लें वो चाय जो महकाती है समाँ, रूह में बस कर
वो इक अधूरी सी चाय , अभी बाक़ी है



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