1.
हम चले आए हैं घर को
तुम्हारे छलकते प्यार के संग
लबालब भरा ही तो छलकता है
आँखों से कोई रंग बिखरता है
मन है कि उसी को पकड़ता है
वो जो ढूँढो तो नहीं मिलता
वही आफताब खिलता है
तुम जो बाँट रहे हो , वही पाओगे
दिल में दुआओं का चमन पलता है
आओ रख लें उसे सीने में
धरोहर की तरह जो मिलता है
गुलाबों की क्यारी तो महकती ही मिले
अहसास-ए-चमन रूह में घुलता है
2.
तुम्हें याद कर रहे हैं
वो लम्हें आबाद कर रहे हैं
फूल खिलते हैं , समाँ महकता है
ताजा हो जाते हैं मँज़र
बस वही भुनाए बैठे हैं
तुम्हें याद कर रहे हैं
यादें इतनी मीठी हों जब
तो आँखें भी नम न हों क्या
सीने में कुछ बसाए बैठे हैं
तुम्हें याद कर रहे हैं
अभी-अभी हम वहीं थे
अभी-अभी बीती बात हो गए
अहसास ही जगाए बैठे हैं
तुम्हें याद कर रहे हैं
तुम्हें याद कर रहे हैं
वो लम्हें आबाद कर रहे हैं


