गुरुवार, 20 अगस्त 2026

कभी बेवजह ही


कभी बेवजह ही गुनगुनाइये 

बदल जायेंगे मन के मौसम , बेवजह यूँ ही मुस्कुराइए 


छँट जाएँगे ग़म के सारे बादल 

हर रात लाती है सुबह ये जान जाइए 


तैरना आ जाएगा भँवर में भी 

भारहीन होने की कला जान जाइए 


मुश्किलें हैं तो हैं ,होने दो 

लय मिलाना सीख जाइए 


हर ग़म गुज़र ही जायेगा 

बिखरना मना है निखरना सीख जाइए 


ज़िन्दगी है साँस-साँस एक जश्न 

साथ-साथ थिरकना सीख जाइए 


कभी बेवजह ही गुनगुनाइये 

बदल जायेंगे मन के मौसम , बेवजह यूँ ही मुस्कुराइए 




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