कभी बेवजह ही गुनगुनाइये
बदल जायेंगे मन के मौसम , बेवजह यूँ ही मुस्कुराइए
छँट जाएँगे ग़म के सारे बादल
हर रात लाती है सुबह ये जान जाइए
तैरना आ जाएगा भँवर में भी
भारहीन होने की कला जान जाइए
मुश्किलें हैं तो हैं ,होने दो
लय मिलाना सीख जाइए
हर ग़म गुज़र ही जायेगा
बिखरना मना है निखरना सीख जाइए
ज़िन्दगी है साँस-साँस एक जश्न
साथ-साथ थिरकना सीख जाइए
कभी बेवजह ही गुनगुनाइये
बदल जायेंगे मन के मौसम , बेवजह यूँ ही मुस्कुराइए



वाह
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 26 अगस्त 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंअथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
बेहतरीन गज़ल नुमा कविता
जवाब देंहटाएंवंदन
तैरना आ जाएगा भँवर में भी
जवाब देंहटाएंभारहीन होने की कला जान जाइए
भारहीन होने के लिए मैं को छोड़ना होगा और ये कला आनी इतनी भी आसान कहाँ।
तैरना आ जाएगा भँवर में भी
जवाब देंहटाएंभारहीन होने की कला जान जाइए
भारहीन होने के लिए मैं के बोझ को छोड़ना होगा ।
ये कला इतनी भी आसान कहाँ ...
सुंदर सृजन।
जोशी जी , दिग्विजय जी , सुधा जी बहुत बहुत धन्यवाद । पम्मी जी link को शामिल करने का बहुत बहुत आभार ।
जवाब देंहटाएंबिखरना मना है
जवाब देंहटाएंलाजवाब है यह मनाही