बेशक घर के बाहर नेम प्लेट में नाम नहीं है मेरा
शनिवार, 31 जुलाई 2021
औरत का अस्तित्व
रविवार, 25 जुलाई 2021
प्रार्थना
श्री श्री रविशंकर जी कहते हैं
बुधवार, 21 जुलाई 2021
माँ
शुक्रवार, 2 जुलाई 2021
पकड़ें उजाले
दिल टूटे तो कौन संभाले
पीता क्यूँ है विष के प्याले
इस दुनिया में कौन सखा है
किस उम्मीद के चुग्गे डाले
सहरा में जलता है कोई
किसने देखे पाँव के छाले
धुलते कहाँ राहों के हादसे
सीने में उगे जो जँगल-झाले
छेड़ो कोई ऐसी धुन
पाँव थिरकते मनुवा गा ले
अम्बर से बरसें किरणें
लपक-लपक हम पकड़ें उजाले
मंगलवार, 22 जून 2021
बचपन की यादें
यादों की गुल्लक फोड़ूँ तो ,
बचपन ज़िन्दा हो उठता है
माँ का आँचल लहराता है ,
इक छाँव मेरे सँग चलती है
साया जो पिता का सर पर था ,
जैसे अम्बर ताने हाथ खड़ा
मुश्किल से मुश्किल राहों पर ,
वो बेफिक्री ,महफ़ूज़ियत आज भी मेरे सँग चले
भाई-बहनों में छोटी थी ,
खेल-खिलौने ,झूले सब मेरे थे
सावन का झूला वो अँगना में ,
लाड-दुलार सँग कोई लौटाए तो
गुड्डे-गुड़ियों की दुनिया में ,
कुछ सँगी थे ,कुछ साथी थे
अपनी-अपनी दुनिया में खो गये सब ,
वो नन्ही दुनिया आज भी मुझको दिखती है
कुछ दोस्त गले से लगाये थे ,
जैसे जां में अपनी समाये थे
कोई दिल के बदले दिल दे दे ,
मैं आज भी ढूँढती फिरती हूँ



