मंगलवार, 29 जून 2010

थोड़ी दूर वो साथ चलें

थोड़ी दूर वो साथ चलें तो 
अपना आप भी अच्छा लगता है
अरमानों की इन गलियों में
सपना सा भी सच्चा लगता है

अपने दिल की बात कहूँ मैं
मुड़ के आयें वो मौसम जो
अपनों का सँग-साथ सुहाना अच्छा लगता है

बहुत है चाहा हमने तुमको
कह न पायें वही बात जो
दिल माँगे वही साथ पुराना अच्छा लगता है

थोड़ी दूर वो साथ चलें तो
अपना आप भी अच्छा लगता है
अरमानों की इन गलियों में
सपना सा भी सच्चा लगता है

2 टिप्‍पणियां:

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

मन को छू गये ये अपने अपने से भाव।
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संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति