१.
लबों को सीते वक़्त
मन को भी सी लेना
इसको आदत है
टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर चलने की
अपनी पगडंडी पर
डगमगाता है
सधे क़दमों चलने वालों का
ध्यान नहीं बंटता है
यात्रा का अभिवादन ही
उनके आगे-पीछे बसता है
२.
चलता तो है
डगमगाता है तू
बैसाखी पकड़ता तो है
धराशाई भी हो जाए तो क्या
उठ कर फ़िर से चलने का
जज्बा मचलता तो है


