तिनका-तिनका चुन कर नीड़ बनाया आशा का
कर पायेंगे , उड़ पायेंगे , दिन अच्छे भी आयेंगे
दाना-दाना निगलाया आशा का
कोई टहनी , कोई शाखा , कोई जमीं , कोई आसमाँ
नन्हें पँखों को सहलाया , दिन अच्छे भी आयेंगे
दाना-दाना निगलाया आशा का
भरते हैं घूँट भी हम अक्सर किरणों के प्याले से
आएगा सबेरा ,निकलेगा सूरज , विष्वास दिलाया
दिन अच्छे भी आयेंगे
दाना-दाना निगलाया आशा का
कर पायेंगे , उड़ पायेंगे , दिन अच्छे भी आयेंगे
दाना-दाना निगलाया आशा का
कोई टहनी , कोई शाखा , कोई जमीं , कोई आसमाँ
नन्हें पँखों को सहलाया , दिन अच्छे भी आयेंगे
दाना-दाना निगलाया आशा का
भरते हैं घूँट भी हम अक्सर किरणों के प्याले से
आएगा सबेरा ,निकलेगा सूरज , विष्वास दिलाया
दिन अच्छे भी आयेंगे
दाना-दाना निगलाया आशा का


