मंगलवार, 8 मार्च 2022

महिला दिवस

 नारी तुम कितनी सहिष्णु हो 

ये तय होगा ,जब सहेज रखोगी रिश्तों को 


सहचर जो तुम्हारे संग होंगे , दिन-रात तुम्हें आज़मायेंगे

कुछ ऐसी करनी करना तुम 

जीवन की धूप सुहानी लगे 

कोई मीठी मधुर कहानी लगे 


परिवार ही तेरा पहला धन , जो छपा होगा तेरी सूरत पर 

जननी का ओहदा मिला तुझको 

इक आसमाँ तुझको  मिला खुद का 

पँखों में जो तू समेट सके 


टूटी-बिखरी किसी मूरत का कोई भी मोल नहीं होता 

कीमत कर लो तुम खुद की भी 

बेशक़ीमती हो ,बेमोल बिको 

कोई भी मोल चुका न सके 



कोई टिप्पणी नहीं: