गुरुवार, 26 मार्च 2026

अपनी-अपनी

अपनी-अपनी धरती है ,अपना-अपना है अम्बर

अपनी-अपनी सूलियाँ,अपनी-अपनी है उजास 


अपने-अपने सपने हैं ,अपनी-अपनी बेड़ियाँ 

अपने-अपने दायरे , अपनी-अपनी है उड़ान 


अपने-अपने बोझ हैं,अपनी-अपनी है डगर 

अपनी-अपनी मंजिल,अपना-अपना है सामान 


अपनी-अपनी दौड़ है , अपनी-अपनी भीड़ है 

अपनी-अपनी तन्हाई ,अपने-अपने हैं हिज़ाब 


अपनी-अपनी हस्ती है ,अपनी-अपनी बस्ती है 

अपने-अपने कन्धे,अपने-अपने हैं विश्वास 


अपनी-अपनी नजर है,अपना-अपना दृष्टिकोण 

अपने-अपने वास्ते , अपना-अपना कुल-जहान 

सोमवार, 12 जनवरी 2026

सूरज ओट से झाँक रहा है














रोज़ कनखियों से देखे हमें 

सूरज ओट से झाँक रहा है 

कितने अधीर हम उसके लिए 

अपनी करनी ढाँक रहा है 


रोज़ सबेरे हम उठ देखें 

क्या मिजाज हैं उस के 

उसकी मर्जी से चलते हम 

टुकड़ों में धूप वो बाँट रहा है 


सर्द ही दिन हैं सर्द ही रातें 

मौसम से मजबूर हैं हम सब 

चन्दा-तारे कोहरे में लिपटे 

सूरज भी थर-थर काँप रहा है 


टोपी मोजे जूते जैकेट 

भर-भर सबको बाँट रहा है 

रोज़ सफ़र पर निकले ,हम तक न पहुँचे

लाख कोशिशें , देखो कितना हाँफ रहा है