सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

शनिवार, 28 दिसंबर 2024

गुम हो गये सफ़हे

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गुम हो गये सफ़हे  वक्त की किताब से  ढूँढे से नहीं मिलते  वो जो लोग थे नायाब से  आब तो थी  लश्करे-आफ़ताब सी  ओझल हो गया वही चमन  जिसकी तहरीर ...
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मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024

A visit to Frankfurt

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अभी मैं तुम्हारे शहर से गई नहीं हूँ  अभी तो मैं बाक़ी हूँ उन अहसासों में  अभी तो सुनाई देती है मुझे गोयथे यूनिवर्सिटेट और तुम्हारे घर के बीच...
सोमवार, 22 जुलाई 2024

माँ तुम अक्सर याद आती हो

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माँ तुम अक्सर याद आती हो  होती   हूँ   जब - जब   निराशा   के   गर्त   में   तुम   आ   कर   सहला   जाती   हो   कौन   आस - पास   घूमा   करता  ...
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गुरुवार, 18 जुलाई 2024

बच्चों के दम पर

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बच्चों के दम पर भी हम देखते हैं दुनिया  ये कभी भी , कहीं भी ले चलते हैं  कुछ भी ख़रीदवा देते हैं  और हम जैसे अपने माँ-बाप की उसी छत्रछाया मे...
रविवार, 21 जनवरी 2024

जीने का जज़्बा

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अरमाँ की तरह जो संग चले  बाहों में वो कुछ यूँ भर ले  जैसे कोई अपना होता है  जैसे कोई सपना होता है  कानों में वो कुछ यूँ कहता  धरती अपनी ,दुन...
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तू हर सू है छाया

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तू पत्ते-पत्ते में ,हरी डालियों में  तू ही तो झूमता है ,गेहूँ की बालियों में  तू ही प्रेरणा में , तू ही वन्दना में  तू ही बजता है , समय की त...
सोमवार, 28 अगस्त 2023

सखी-सहेलियों जैसे रिश्तों के लिये

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सइयो नी , सइयो नी  आ दुक्खाँ दे लीड़े धो लइये  कुझ कह लइये , कुझ सुन लइये  तेरे वेहड़े धुप्प ही धुप्प  मेरे वेहड़े छाँ कोई ना  कट जायेगा रा ...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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