सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

गुरुवार, 26 मार्च 2026

अपनी-अपनी

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अपनी-अपनी धरती है ,अपना-अपना है अम्बर अपनी-अपनी सूलियाँ,अपनी-अपनी है उजास  अपने-अपने सपने हैं ,अपनी-अपनी बेड़ियाँ  अपने-अपने दायरे , अपनी-अप...
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सोमवार, 12 जनवरी 2026

सूरज ओट से झाँक रहा है

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रोज़ कनखियों से देखे हमें  सूरज ओट से झाँक रहा है  कितने अधीर हम उसके लिए  अपनी करनी ढाँक रहा है  रोज़ सबेरे हम उठ देखें  क्या मिजाज हैं उस ...
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गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

सब कुछ भूलने के लिए बना है

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  सब कुछ भूलने के लिए बना है   वो बचपन का घर  शहर-शहर घूम कर भी  ज़िंदा है ज़हन में  मगर भूलने के लिए बना है  हम बड़ी दूर चले आये हैं ,  उस ...
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शुक्रवार, 12 सितंबर 2025

कल ही

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कल   ही   मैंने   उस   याद   के   पन्ने   फाड़े   हैं   बहुत   बोझ   हो   जाता   है   माज़ी   पर जो   वज़ूद   पे   भारी   हो   उसे   फाड़   ...
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बुधवार, 16 जुलाई 2025

दिल में इक अलख

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अपने टूटे टुकड़े बटोर के रखती हूँ   मैं हर सुबह कुछ जोड़ के रखती हूँ  मेरी लेखनी को बीमारी है सच बोलने की  मैं अपनी सोच संभाल के रखती हूँ  ल...
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मंगलवार, 29 अप्रैल 2025

सलवट-सलवट चेहरा

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झुर्री-झुर्री हाथ हुए हैं ,सलवट-सलवट चेहरा  खो ही गया वो नन्हा बच्चा, बड़ा हुआ था पहन के जो  अरमानों का सेहरा  एक-एक कर कहाँ गये वो उम्र के ...
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रविवार, 30 मार्च 2025

दरो-दीवार बोलते ही रहे

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दरो - दीवार   बोलते   ही   रहे   हमने   कान   ही   न   रखे   सखी - सहेलियों   के   प्यार   ने   खींचा   भी   बहुत   हमने   ही   मुँह   फेर  ...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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