सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

उसकी आँखों में दिवाली उतर आई होगी

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वो बन सकता था खुदा , अपनी कीमत उसने खुद ही , कमतर आँक ली होगी क्या दिया तुमने जो दिया , हक़ उसी का था , चीज अपनी ही माँग ली होगी तोड़ो न द...
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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011

हालात के हाथों में

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हालात के हाथों में है चाभी अपनी जिन्दगी ये भी है कैसी गुलामी अपनी कौन साबुत है बचा वक्त के हाथों से सुहाने पल भी हैं सुनामी अपनी ख़्वाबों के ...
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गुरुवार, 29 सितंबर 2011

यूँ दूर के चन्दा हो

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यूँ दूर के चन्दा हो सारी बातेँ न पहुँचतीं तुझ तक मेरी सदायें लौट आतीं मुझ तक चाँदनी रात का भरम ही सही तेरा इतना सा करम ही सही है आसमाँ तो अँ...
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सोमवार, 19 सितंबर 2011

चमकीला होता है अम्बर क्या

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ऐ सूरज , ऐ चन्दा बता वो दिन कैसा होता है अरमान की बिंदिया माथे सजा जब रोज सुबह कोई गाता है चमकीला होता है अम्बर क्या मेरी उम्मीदों से ज्या...
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गुरुवार, 8 सितंबर 2011

ये जो सामान रखा है

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बम ब्लास्ट से फिर दिल्ली दहल उठी .... कभी किसी ब्रीफ केस , कभी कोई पोलिथीन या फिर मानव बम .... ये जो सामान रखा है कित...
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सोमवार, 29 अगस्त 2011

पानी भूल आए घर

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हौसले मेरे नहीं हैं टूटे हुए पत्थरों से उलझ कर भी साबुत हूँ मैं जिन्दगी यूँ कोई गीत , गुनगुनाती रही तप रहा आसमाँ , राह तपती हुई मँजिल यूँ ...
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बुधवार, 17 अगस्त 2011

अन्ना हैं एक मशाल

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अन्ना जैसे एक आन्दोलन का नाम , उन्हों ने जब एक मुहिम छेड़ी तो हजारों लोग उसमें शरीक हो गए । ये पीड़ा ही तो है जिसन...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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