सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

सोमवार, 29 अगस्त 2011

पानी भूल आए घर

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हौसले मेरे नहीं हैं टूटे हुए पत्थरों से उलझ कर भी साबुत हूँ मैं जिन्दगी यूँ कोई गीत , गुनगुनाती रही तप रहा आसमाँ , राह तपती हुई मँजिल यूँ ...
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बुधवार, 17 अगस्त 2011

अन्ना हैं एक मशाल

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अन्ना जैसे एक आन्दोलन का नाम , उन्हों ने जब एक मुहिम छेड़ी तो हजारों लोग उसमें शरीक हो गए । ये पीड़ा ही तो है जिसन...
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गुरुवार, 11 अगस्त 2011

कैसे करूँ पर्बत को राई

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सारी दुनिया ऐसी पाई पल में तोला पल में माशा कैसे करूँ पर्बत को राई अपनी फितरत देख तमाशा दिल अपना और प्रीत पराई दर्द की अपनी ये ही भाषा छोड़ ...
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शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

माँ

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२२ जुलाई , आज पूरे दस साल हुए माँ को दुनिया छोड़ कर गए हुए , श्रद्धांजलि स्वरूप कुछ पंक्तियाँ उनके लिये ...... जिन्दगी भर बचपन बोला करता ...
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गुरुवार, 14 जुलाई 2011

चेहरा कैसा है दहशत का

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मौत का होल सेल प्रोग्राम चल रहा था , जो भी उस वक्त पास से गुजरा , उसकी चपेट में आ गया । ये हाड़-मांस के पुतले मशीनें नहीं थे , दिल जिगर भी र...
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मंगलवार, 5 जुलाई 2011

जिन्दगी सी मिठास

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जीवन रेत और चीनी का मिश्रण  बड़ी सफाई से बीनना होगा रेत के कण फिर भी साथ साथ लिपट आयेंगे प्रेम के पानी से जुदा करना होगा काम की बात उठा भ्र...
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बुधवार, 29 जून 2011

जब वो गुलशन से मुँह मोड़ लेता है

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नहीं नाराज नहीं खाते हैं , पीते हैं , इबादत भी करते हैं उम्मीद अब मुरझाने लगी है गम कोई खाने लगी है इंतज़ार को बहलाने के लिये शब्द कम पड़ने लग...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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