सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

सोमवार, 28 जनवरी 2013

रिश्तों को चाहिये

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कड़वे से घूँट  सब्र के प्याले से  हाय क्या अन्दाज़ हैं  दर्द के निवाले से  पाए हैं ज़ख्म  गुलाबों की चाह में  ज़िन्दगी की राह में  ...
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शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

रवानी की तरह चल

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वक्त देता नहीं मोहलत  कहानी पूरी हो जाती है  फिसल जाती है हाथों से  ज़िन्दगानी अधूरी हो जाती है  ज़िन्दगी,  ढीठ हो जाने तलक  या पिघल ...
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शनिवार, 12 जनवरी 2013

Happy Daughter's Day

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International Daughter's Day  बेटी , जिगर का टुकड़ा  फूलों का जैसे मुखड़ा  बेटी है दिल की धड़कन  जैसे हो कोई दौलत  बेटी है घर ...
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गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

माँ ! मैं जीना चाहती हूँ

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पैरामेडिकल की छात्रा के साथ दरिन्दगी ...एक जँग अभी अभी हारी है ...दूसरी जँग ज़िन्दगी और मौत के बीच झूलते हुए उसने कहा ..माँ ! मैं जीना चाहत...
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शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

लम्हे भर की बात नहीं

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सपनों वाली रात नहीं  दिन के उजाले साथ नहीं  एक ज़रा सा दिल टूटे तो  ये दुनिया अपने पास नहीं  कहने लगे अपनी बातें  रूह भटकती साथ नहीं ...
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बुधवार, 5 दिसंबर 2012

गली गली फिर मीरा

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गली गली फिर मीरा , बावरी होई  पीड़ मीरा की , न जाने कोई  जा तन लागे , जाने सोई  इक तो दुनिया न अपनी होय  दूजे राणा जी न समझे मोय  कान...
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गुरुवार, 29 नवंबर 2012

थोड़ा पुचकारा है

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इक झन्नाटेदार थप्पड़ कुदरत ने  हमें धीरे से मारा है  टूट कर बिखर न जाएँ कहीं , थोड़ा पुचकारा है  ज़िन्दगी की न्यामतें दे कर सभी  चुपके...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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