सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

शनिवार, 15 मई 2021

चन्द गुलाबों की खातिर

›
खिलौने दे के बहलाये गये हैं  बच्चों की तरह फुसलाये गये हैं  नसीब से तो जँग होती नहीं है  हर ठोकर पे समझाये गये हैं  कोशिशों का ही नाम है चलन...
6 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 3 अप्रैल 2021

तुम्हारे आने की जबसे हलचल उट्ठी

›
 तेरे आने की जबसे हलचल उठ्ठी  आम के बौर हैं चौंधियाए हुए  नीबू शरीफे के फूल हैं मुस्काये जाते  और सारी बेलें हैं कानाफूसियाँ करतीं  सिन्दूरी...
2 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

बड़ी दीदी की इक्कतीसवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धान्जलि स्वरूप

›
वो स्नेहमई ,त्याग से भरीं , ममता की मूरत सी थीं  दुनिया से जुदा ,निष्छल सी कोई सूरत सी थीं  घर की बड़ी बेटी किसी स्तम्भ सी थीं  किस को मालूम ...
सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

स्मृतियाँ शेष हैं

›
वही सड़कें हैं ,वही शहर है  मगर बस आप नहीं हैं  चीजों की मियाद होती है  बस आदमी की नहीं है  कोई ऐसे भी जाता है क्यूँ दुनिया से  न जी भर के की...
2 टिप्‍पणियां:
रविवार, 24 जनवरी 2021

बड़ी दीदी को श्रद्धान्जलि 

›
बड़ी दीदी ,जैसे माँ की छत्रछाया  प्यार और अपनत्व का खजाना  वो आपका गले लगाना कि जैसे हो रूह प्यासी  दिलेर पिता की दिलेर बेटी ,शाहों के शाह की...
1 टिप्पणी:
बुधवार, 9 दिसंबर 2020

बड़ी बेटी का जन्मदिन

›
  सुबहें गुलाबी हों ,शामें हों आसमानी  मेरी बिटिया ,ऐसी हो तेरी ज़िन्दगानी  तेरी आँखों से मैंने देखी दुनिया तेरे हौसले हैं उड़ान मेरी  तेरे पँ...
2 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

चिया का जन्मदिन

›
आज के दिन नन्हीं चिड़िया ने थीं आँखें खोलीं हमारी दुनिया में  किलकारी गूँजी हमारे अँगना में  दीदी चहकी 'बहना आई ,बहना आई ' घर मेरा गु...
2 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.