सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

रविवार, 27 जनवरी 2019

अन्दर से हम वही होते हैं

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हम घूम आयें चाहे जितना भी देश-विदेश  दुबई,मॉरीशस,यूरोप हो या हो कोई भी देश  अन्दर से हम वही होते हैं  अपनी जड़ों से जुड़े  अपने बचपन की अ...
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गुरुवार, 13 सितंबर 2018

जब न होंगीं राहें हक़ में

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कैसे चलोगे जब न होंगीं राहें हक़ में  जब भी कोई गुजर रहा होता है जिस्मानी तकलीफों से  वो सिर्फ जिस्मानी दर्दों से ही नहीं गुजरता है , वो ...
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शनिवार, 4 अगस्त 2018

फ्रैंकफर्ट से आने के बाद

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दिन उड़ गये पँछियों की तरह , खबर न रही  वक़्त की फितरत है , फिसल जाता है हाथों से ,उम्र की ही तरह  अब ये आलम है कि कुछ छूट गया सा लगता है ...
मंगलवार, 29 मई 2018

केदारनाथ में एक रात

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सहलाओ मेरे ज़ख्म भोले ताकि मैं सो जाऊँ  शिव के प्राँगण में , नींद क्यूँ रूठी है  लाशों के ढेर जहाँ कभी गाजर-मूली से बिछ गये हों  दफन हुए ...
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शनिवार, 17 मार्च 2018

आँखों में सितारे भर

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चिया चली गई ससुराल आँखों में सितारे भर , लहँगा पहन ,चुनरी ओढ़ , डाल कर उसके हाथों में हाथ सोचा भी बहुत था , लिखा भी था बोला मगर कुछ...
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सोमवार, 16 अक्टूबर 2017

सवाल आरुषि की माँ से

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 जैसे है हक़ तुम्हें जीने का  वैसे ही हक़ था उस नन्हीं जान को भी दुनिया में रहने का  हाँ तुम्हारी आँखों में नहीं है तड़प  ये जान लेने की कि...
बुधवार, 6 सितंबर 2017

कैसे कोई उड़ान भरे

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सूने हो गये घर-अँगना , जो आबाद हुये थे बच्चों के आने से , मन की ये फितरत है , सजा लेता है दुनिया जिन क़दमों की आहट से भी , बुन लेता है रँग...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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