सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

रविवार, 7 अगस्त 2016

मेरे फूल खिले हैं कहीं न कहीं

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आजकल मैं तुम्हारे आने की तैयारियों में जी लेती हूँ  तुम्हें ये पसन्द  है , तुम्हें वो अच्छा लगता है  इन्हीं ख्यालों में रह-रह के मुस्कुरा...
शनिवार, 18 जून 2016

खुशबू का बाग़

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जीवन उसका दिया है , सँभालेंगे हम कुछ भी हो , कैसे भी हो , निभा लेंगे हम सफर का सजदा करते हुए , लम्हे का मजा उठा लेंगे हम चेहरा ये मेरा ...
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शनिवार, 30 अप्रैल 2016

नन्हीं सी गिलासी

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तेरे बचपन की गिलासी  माँ ने पिलाया होगा पानी , और दी होगी ममता की घुट्टी  है ये तेरे बचपन की साथी , मूक गवाही नन्हीं हथेलियों की ...
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बुधवार, 13 अप्रैल 2016

परवरिश की फसल लहलहाई है

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सत्ताइस साल पहले दुनिया छोड़ गईं दीदी की नातिन ने जो सैनफ्रांसिस्को में रह रही है , जब ये फैसला लिया कि  वो अपने नाम के  बीच में दीदी का ना...
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मंगलवार, 1 मार्च 2016

खो जायेंगे ये रिश्ते

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मैं कोई टिश्यू की तरह नहीं हूँ  के वक़्त जरुरत तो काम ले लो मुझसे , आँसू पोंछ लो अपने  फिर भुला दो मेरे वज़ूद को भी  नम हो आती हैं आँखे...
गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

चिरनिद्रा में सो गये तुम

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विशाल , जिसे मैंने बच्चे से बड़े होते हुये देखा , आज उसी को श्रद्धाँजलि दे रही हूँ। उसके भोलेपन और सादगी को मैं बार-बार प्रणाम करती  हूँ।...
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रविवार, 13 दिसंबर 2015

क्या-क्या लिक्खा

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देखूँ तो जरा , मेरे क़दमों में तूने है क्या-क्या रक्खा  मेरी पेशानी पे है क्या-क्या लिक्खा  ऐ लेखनी तेरे क़दमों की धूल बनूँ  लो फिर मैंन...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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