सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

चिरनिद्रा में सो गये तुम

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विशाल , जिसे मैंने बच्चे से बड़े होते हुये देखा , आज उसी को श्रद्धाँजलि दे रही हूँ। उसके भोलेपन और सादगी को मैं बार-बार प्रणाम करती  हूँ।...
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रविवार, 13 दिसंबर 2015

क्या-क्या लिक्खा

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देखूँ तो जरा , मेरे क़दमों में तूने है क्या-क्या रक्खा  मेरी पेशानी पे है क्या-क्या लिक्खा  ऐ लेखनी तेरे क़दमों की धूल बनूँ  लो फिर मैंन...
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रविवार, 27 सितंबर 2015

सारे के सारे सच बोल दिये

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किस्मत ने पत्ते खोल दिये  सारे के सारे सच बोल दिये  छन्न से सारे बिखरे अरमाँ  भरमों के हाथ में ढोल दिये  कोई रानी राजा गुलाम दिये  हा...
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मंगलवार, 25 अगस्त 2015

पेरेन्ट्स का रिटायरमेंट

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तुम इस बदलाव के साझीदार बने  हो हर कदम पर हमारे साथ  ये सुकून है हमको  बोये थे जो बीज कभी , फूल बन कर लहलहाये हैं  दुनिया की हवाओं में...
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सोमवार, 3 अगस्त 2015

आगे नया सबेरा रे

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जड़ पकड़ने लगी है मीठी नीम  फूलने लगे हैं जिरेनियम   चल उड़ जा रे पँछी  के अब ये देस हुआ बेगाना  आस निरास के दोराहे पर  डाला है क्यूँ डे...
शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

अलविदा रास्तों

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बचपन का घर छूटा जब , दिल को मालूम था कि इन मायके की तरफ जाते हुये रास्तों से अब आगे गुजरना मुमकिन न हो पायेगा..... अलविदा रास्तों , पेड़...
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शनिवार, 18 जुलाई 2015

अब कौन समझने वाला है

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क्या कहिए अब इस हालत में , अब कौन समझने वाला है कश्ती है बीच समन्दर में तूफाँ से पड़ा यूँ पाला है हम ऐसे नहीं थे हरगिज़ भी हालात ने हमको ढ...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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