सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

रिश्ता ,ऐतबार का

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एक माँ की नजर से.... मैंने बहुत चाहा कि  बनूँ वो रिश्ता ,ऐतबार का  वो छाँव आराम की  वो गोद चैन की  दुनिया से हताहत हो कर भी  पाओ जहाँ...
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गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

आज़ाद हो जाती हूँ

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यूँ तो आम धारणा ये है कि लेखन निठल्ले लोगों का काम है। कहीं पढ़ा था कि जब सारी ऊर्जा केन्द्रित हो कर लेखन में उतर आती है , तभी कविता का जन्म...
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शुक्रवार, 27 मार्च 2015

पलकों पे है जो ठहरा

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वाट्स एप पर ग्रुप बना कर कॉलेज के वक्त के साथियों से मिलाने का काम किया एक मित्र ने , चालीस साल का लम्बा अन्तराल ...अब चेहरों को पहचानने की...
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शनिवार, 21 मार्च 2015

नया साल है , नई बात हो

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आओ हम इक दीप जलाएँ  अँधियारे को दूर भगाएँ  नया साल है , नई बात हो  एक नई उम्मीद जगाएँ  मन मैले को खूब बुहारें  दम भर को फिर हम सुस्त...
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मंगलवार, 3 मार्च 2015

मिट्टी में तेरा मान रे

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अज्ञान ,अशिक्षा ,अविवेक ने , मन पे रक्खी न लगाम रे अपने ही हाथों अपनी ही दुनिया का ,कर डाला काम तमाम रे चरस ,गाँजा ,सिगरेट ,शराब , दाँव पे ...
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सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

तक रहीं हैं दाएँ-बाएँ

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बेटे के फिलीपींस जाने के बाद अगली सुबह उसके कमरे में जाने पर मेरी संवेदनाओं ने जो लिखा..... तुम्हारे जाने के बाद एक सन्नाटा सा पसरा ह...
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बुधवार, 4 फ़रवरी 2015

मँहगाई कैसे न बढ़े

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राशन की दुकानों में ' ए ग्रेड ' की जगह ' बी ग्रेड ' का माल बिका  खानसामों ने अपने खाने के बहाने , अपने पूरे घर का पेट भरा ...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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