सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

तक रहीं हैं दाएँ-बाएँ

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बेटे के फिलीपींस जाने के बाद अगली सुबह उसके कमरे में जाने पर मेरी संवेदनाओं ने जो लिखा..... तुम्हारे जाने के बाद एक सन्नाटा सा पसरा ह...
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बुधवार, 4 फ़रवरी 2015

मँहगाई कैसे न बढ़े

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राशन की दुकानों में ' ए ग्रेड ' की जगह ' बी ग्रेड ' का माल बिका  खानसामों ने अपने खाने के बहाने , अपने पूरे घर का पेट भरा ...
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बुधवार, 28 जनवरी 2015

इसी खिड़की से

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इसी खिड़की से बाहर देख-देख कर , कितना मैंने अन्दर झाँका  हिलती धरती , पाँव बहकते , एक फलक मैंने अन्दर टाँका  ऊँचे पहाड़ों से घिरी झ...
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शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

हवाओं के रुख को

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वक़्त मेरी धज्जियाँ उड़ाता ही रहा  मैं शब भर चिन्दी-चिन्दी बटोरती रही  टूटे सपनों की किर्चें , धज्जी-धज्जी  मैं दम भर  लम्हा-लम्हा जोड़ती ...
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मंगलवार, 6 जनवरी 2015

कतरा भी समन्दर ही है

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मैं इसी भीड़ का हिस्सा हूँ  वही पुराना कोई किस्सा हूँ  चाहता तो हूँ मैं भी अगली पंक्ति में होना  पहचान मगर कहाँ किसी आँख में उभरी  पीछे...
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बुधवार, 17 दिसंबर 2014

झुलसा हुआ चमन है

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पेशावर में इतना बुरा हादसा , कितने बच्चे बलि चढ़ गये , कितने ज़ख्मी हो गये।  कहते हैं कि बचपन में खाई हुई दहशत ताउम्र प्रभावी रहती है। इसका अ...
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मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

अभी कल तो थे तुम ,

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अभी कल तो थे तुम , इसी झील में नाव खेते हुये  दिल ने क़ैद किया वही अक्स  वही शहर है , वही घर है  मगर तुम आस-पास नहीं हो  तुम थे तो ,...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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