सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

बुधवार, 16 जुलाई 2014

दीदी की तरह

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दिल सदा है चाहता  माँ की तरह , दीदी की तरह , बालों को सहलाये कोई  कस के गूँथीं थीं उन्होंने , अब कहाँ वो दो चोटियाँ  अब कहाँ वो डाकिय...
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सोमवार, 23 जून 2014

ऑपरेशन टेबल पर मरीज़ की मनः स्थिति

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ऑपरेशन की तैय्यारी में जुटे लोग  ऑपरेशन टेबल पर लेटा हुआ मरीज़  बकरा हलाल होने को तैय्यार  दिल उछल-उछल कर बाहर निकलने को है  सिरिंज घोंप...
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रविवार, 20 अप्रैल 2014

किसी ऐतबार की तरह

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ज़िन्दगी कोई पकी-पकाई थाली तो नहीं  जो परस दी गई हो तेरे आगे  और तू कहे कि ,लज्जत-दार है , है ज़न्नत मेरे आगे  ज़िन्दगी लाख मेरे क़दमों का...
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गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

सेर और सव्वा बने

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फ़कत दुनिया की सैर करने को  आदम और हव्वा बने  रोज पीता है ग़मों की शराब  अद्धा और पव्वा बने  आदमी आदमी को सहता नहीं  सेर और सव्वा बने ...
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बुधवार, 5 मार्च 2014

ऐसी दुनिया में कैसे चलिये

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ऐसी दुनिया में कैसे चलिये  आदमी ठगा है हुआ  औरों को ठगने निकला है  एक ही लाठी से हाँक रहा सबको  चरवाहा बना बैठा है  चुप से देख रहे है...
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मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

ज़िन्दगानी का सबब

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हम सबने एक ही जाम पिया  थोड़ा सोडा , थोड़ी शराब , थोड़ा पानी  थोड़ा हाजमा ,थोड़ा नशा , थोड़ी ज़िन्दगानी  प्यास और नशे का फर्क ढूँढते रहे  ज़...
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गुरुवार, 16 जनवरी 2014

रिश्तों को ही सराहिये

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जितना जुड़े जमीन से ,उतना सुन्दर रूप  खिले हुए ज्यों फूल से , शोभा बनी अनूप  हर घर को वो धूप दे , फर्क न करता कोय  सूरज जैसा पथिक भी , क...
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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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