सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

नैनीताल और लकड़ी का घर

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लकड़ी का घर है अपना  जैसे हो कोई हाउस-बोट  इधर झील है  झील में चँदा  हिलते अक्स और छतें हैं ढलवाँ  उधर पहाड़ है  खुला आसमान ह...
शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

जो अभी हारा नहीं है

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दुआ में उठते हुए हाथ भी थक गये हैं  नाराज़गी भी कर देती है ज़िन्दगी से महरूम  दरक रहा है वक़्त  उम्र पसीने-पसीने है  इकतरफा जतनों से क...
शनिवार, 19 अक्टूबर 2013

जन्म-दिन मुबारक हो तुझे

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नर्म सा अहसास कोई निकला है  मेरा दिल बया का घोंसला हो जैसे  इठलाती हुई , इतराती हुई ,अन्दर-बाहर जाती हुई  तेरे प्यार का बिछौना है बिछा ह...
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बुधवार, 16 अक्टूबर 2013

अहम का फन

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ज्यादातर लोग किसी से मिलते ही उसकी हैसियत कैलकुलेट करने लगते हैं यानि इज्जत का पोस्ट-मार्टम करने लगते हैं  ये हैसियत कई मायनों में बयाँ ह...
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शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

सोहनी के हिस्से में अक्सर

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ज़िन्दगी की उलझनें सुलझाते-सुलझाते धरा की न जाने कौन सी बात अम्बर को चुभ गई ...सीने की सारी नमी खत्म हो गई ... माथे की लकीरें बोलें न  ...
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मंगलवार, 3 सितंबर 2013

और तुम उफ़्फ़ भी नहीं करने देतीं

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ज़िन्दगी किस कदर ख़ूबसूरत मैंने तुम्हें देखना चाहा मुट्ठी से हर बार फिसल जाती हो और उफ़्फ़ भी नहीं करने देतीं ये किस मोड़ पे ले आती हो म...
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बुधवार, 7 अगस्त 2013

नींव हिलाते लोग मिले

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कैसे-कैसे लोग मिले  ऐसे वैसे लोग मिले  इक भी मिला न मन का साथी  ऐसे कैसे सँजोग मिले  खेल रहे हैं जज़्बातों से   तभी तो मन के रोग मिल...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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