सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

बुधवार, 30 नवंबर 2011

अपने दम पर

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समझा था जिसे छाया मैंने वो तो बादल का टुकड़ा भर था झीनी चदरिया तार-तार हुई और तपता सूरज सर पर था भरमों के बिना जीवन कैसा अरमाँ का अपना भी कोई...
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गुरुवार, 24 नवंबर 2011

उम्मीद के सूखे पत्ते

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ज़िन्दगी जुए सी है हाथ में आ जाएँ जो थोड़े इक्के सलाम ठोकते हैं सारे पत्ते उम्मीद के सूखे पत्ते मय ज़र्द चेहरों के बड़े बेमन से किये हैं अलग...
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सोमवार, 14 नवंबर 2011

टिम टिम करते तारे

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चौदह नवम्बर पर बच्चों के लिए  नन्हें बच्चे प्यारे आँखों के दुलारे झट से ये मुस्का देते हैं रँग सारे बिखरा देते हैं चन्दा मामा प्यारे थक कर क...
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शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

तुम्हारे जाने से

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बच्चों के घर में कुछ दिन बिता कर जाने के बाद एक अजीब सी ख़ामोशी छा जाती है , जिसे शब्द दे पाना नामुमकिन सा है ... ...
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सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

उसकी आँखों में दिवाली उतर आई होगी

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वो बन सकता था खुदा , अपनी कीमत उसने खुद ही , कमतर आँक ली होगी क्या दिया तुमने जो दिया , हक़ उसी का था , चीज अपनी ही माँग ली होगी तोड़ो न द...
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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011

हालात के हाथों में

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हालात के हाथों में है चाभी अपनी जिन्दगी ये भी है कैसी गुलामी अपनी कौन साबुत है बचा वक्त के हाथों से सुहाने पल भी हैं सुनामी अपनी ख़्वाबों के ...
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गुरुवार, 29 सितंबर 2011

यूँ दूर के चन्दा हो

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यूँ दूर के चन्दा हो सारी बातेँ न पहुँचतीं तुझ तक मेरी सदायें लौट आतीं मुझ तक चाँदनी रात का भरम ही सही तेरा इतना सा करम ही सही है आसमाँ तो अँ...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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