सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

सोमवार, 23 अगस्त 2010

इसके सिवा कुछ भी नहीं मैं

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मैं एक नन्हीं बच्ची हूँ सारी उम्र ज़हन में , बचपन ही बोलता रहा माँ सी कोई गोदी , पिता का सर पे हाथ ही खोजता रहा मैं एक पत्नी हूँ मन चकोर की...
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रविवार, 15 अगस्त 2010

कुछ वतन की बात करें

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पन्द्रह अगस्त पर ... अपने दायरे से बाहर निकलें तो कुछ वतन की बात करें काँटों से दामन छुड़ा लें तो खुशबु-ऐ-चमन की बात करें उलझे हैं साथी...
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बुधवार, 11 अगस्त 2010

जख्म जो फूलों ने दिये

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फूलों के जख्म यानि संवेदन - शील रिश्तों की मार के जख्म , सजा के बैठे थे फूलदानों में यानि रिश्तों को .. मार के जख्मों ...
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रविवार, 1 अगस्त 2010

तेरे मटके के पानी का वो हिस्सा

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दोस्ती के जिस जज्बे ये नज्म लिखवाई , उस जज्बे को सलाम ... आज फ्रेंडशिप डे है जी ... मेरी राहों के हमनवाँ तेरे मटके के पानी का वो हिस्सा...
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रविवार, 25 जुलाई 2010

कोई थपकी , कोई झिड़की , न कोई खजाने की खिड़की

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कर्म करते करते पता नहीं कब काम आदमी को छोड़ जाते हैं या आदमी काम करना छोड़ देता है । और जैसे जिन्दगी फेड होती जाती है । हर जिन्दगी का हश्र यही...
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गुरुवार, 8 जुलाई 2010

वजनी क्या है

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सूखी रोटी न उतरेगी गले से प्यार का सालन चाहिए मेरी तुमको हो न हो जरुरत मुझको तो दुनिया चाहिए सफ़र के साथी हैं हम हाथों में हाथ भी तो ...
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बुधवार, 30 जून 2010

थोड़ी दूर वो साथ चलें

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थोड़ी दूर वो साथ चलें तो  अपना आप भी अच्छा लगता है अरमानों की इन गलियों में सपना सा भी सच्चा लगता है अपने दिल की बात कहूँ मैं मुड़ के आयें ...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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