सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

रविवार, 25 जुलाई 2010

कोई थपकी , कोई झिड़की , न कोई खजाने की खिड़की

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कर्म करते करते पता नहीं कब काम आदमी को छोड़ जाते हैं या आदमी काम करना छोड़ देता है । और जैसे जिन्दगी फेड होती जाती है । हर जिन्दगी का हश्र यही...
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गुरुवार, 8 जुलाई 2010

वजनी क्या है

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सूखी रोटी न उतरेगी गले से प्यार का सालन चाहिए मेरी तुमको हो न हो जरुरत मुझको तो दुनिया चाहिए सफ़र के साथी हैं हम हाथों में हाथ भी तो ...
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बुधवार, 30 जून 2010

थोड़ी दूर वो साथ चलें

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थोड़ी दूर वो साथ चलें तो  अपना आप भी अच्छा लगता है अरमानों की इन गलियों में सपना सा भी सच्चा लगता है अपने दिल की बात कहूँ मैं मुड़ के आयें ...
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रविवार, 20 जून 2010

माली के चमन में उगते हैं गुलाब

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फादर्ज़ डे पर माली ने , बागबाँ ने सीँचा है प्यार से उसके उसूलों ने रखा हिफाज़त से । कानून - कायदे , रस्मों - रिवाज़ ...
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बुधवार, 16 जून 2010

ईंट-गारे से छत नहीं होती

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आज फिर अखबार में पढ़ा ...ऑनर किलिंग ...एक और बेटी भेँट चढ़ गई... जाने वाली की नजर से ... घर के बाहर तो छत नहीं होती घर के अन्दर ही मेरी ...
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गुरुवार, 10 जून 2010

नजर की गुफ्तगू

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यूँ ही नहीं ढूँढती हैं आँखें , किसी को बेसबब दिल से दिल की राह जाती है , यूँ झलक जाते हुए जो नजर उठा कर भी न देखा उसने बिन कहे समझो के हम...
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गुरुवार, 3 जून 2010

संवेदनाएँ छलती हैं

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संवेदनाएँ चलती हैं ऊँचा हो जाता है जब क़द सर से संवेदनाएँ छलती हैं । मुश्किल है मन चलता है पकड़ के मुट्ठी में रखना खलता है । मन के पानी पर ब...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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