सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

बुधवार, 26 मई 2010

खुद से ही दूर

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नहीं जाना है उस गली जो कर दे मुझे खुद से ही दूर पानी से पतला जीवन है फिसला जाता है अपना ही नूर अग्नि से तेज क्रोध है जल जाता है तन मन व...
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शनिवार, 22 मई 2010

ऐसी होती है दोपहर

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आँखों में कटता है पहर ऐसी होती है दोपहर जीवन की दुपहरी दम माँगे नाजुक मोड़ों पर तन्हाई चुभता सूरज भी ख़म माँगे खोल ज़रा तू हाले-जिगर ऐसी होत...
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बुधवार, 12 मई 2010

इतनी सी नमी

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कागद काले हैं किये या धड़कन को पिरोया साँसों में नजर-नजर का फेर है गीत बन जाते , शब्दों के हेर-फेर से अजनबी से लगते हैं दिल का साज छेड़ कर द...
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गुरुवार, 6 मई 2010

धुएँ का पहाड़

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आदमी कुछ भी नहीं हसरतों के सिवा धुएँ का पहाड़ उठता है क्या जाने किधर से आता है चिँगारी दिखाने की देर है लपटों से घिरा नजर आता है कभी बेड़िय...
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बुधवार, 28 अप्रैल 2010

तू जो है सबसे करीब

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नीचे लिखी कविता में ...सबसे करीब ...जिसके लिए लिख रही हूँ , मेरी भान्जी...बड़ी दीदी की बेटी और मैं सबसे छोटी मासी । उसकी आँखों से जैसे ती...
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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

अब आगे तपस्या होगी

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मैं उससे मिली थी , कभी घूमते वक़्त रास्ते में पतिदेव ने परिचय कराया था , ये हमारे बैंक में कम्पनी सेक्रेटरी हैं । परस...
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सोमवार, 19 अप्रैल 2010

बुलबुलें जाने लगी हैं

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एक हफ्ते की छुट्टी लेकर दोनों बेटियाँ घर आईं , चौथे दिन से ही उल्टी गिनती का अहसास होने लगा था , मन पहले डूबा , फिर हौले से तैर कर ऊपर आय...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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